Dt:1-Jun 2000
It was a day, full of tension. Ofcourse!! the results are out. and im yet to go through it. Ya, I know..but still...thers 80 - 20 chances. My Mom's going to accompany me to college. we both reached the lobby. where a long list of roll nos are sticked. She scrolled from top , one by one,without missing a single. 'Congrats Dear!! You Pass!!' she replied. I was stubburn hearing this. No reply. Was looking towards her face with surprise. Wow, she was smiling...Hush!! Tension relesed.
Thursday, July 7, 2011
Wednesday, April 27, 2011
गुजरा वक़्त
पास आकर दूर चले जाते है ॥
हम अकेले थे , अकेले रेह जाते है
दिल का दर्द किसे बताये
मरहम लगाने वाले ही , ज़ख़्म दे जाते है
आपकी आँखों में सितारा नज़र आता है ,
डूबते दिल को किनारा नज़र आता है,
कैसे रोके आरज़ू के समंदर को ?
हर सितम आपका , इशारा नज़र आता है ॥
वक़्त के पन्ने पलट कर ,
फिर वो हसींन लम्हे जीने को दिल चाहता है
कभी मुस्कुराया करते थे सब दोस्त मिलकर ,
उन्हें आज देखने को दिल तरस जाता है ॥
Friday, April 8, 2011
खुशबु
चांदनी रात के हाथो पे सवार उतरी है |
कोई खुशबू मेरी देहलीज़ के पार उतरी है||
इस में कुछ रंग भी है , ख्वाब भी, खुशबुएँ भी|
ज़िलमिलाती हुई ख्वाहिशे भी , आरजू भी |
इसी खुशबू में कई दर्द भी, अफसाने भी |
इसी खुशबू ने बनाये कई देवाने भी |
मेरे आँचल पे उम्मीदों की कतार उतरी है|
कोई खुशबू मेरी देहलीज़ के पार उतरी है||
इसी खुशबू से कई यादो के दर खुलते है|
मेरे पैरो से जो लिपटे तो सफ़र खिलते है|
यही खुशबू जो मेरे घर से उठा लाई थी |
अब किसी तौर पलट कर नहीं जाने देती |
मेरी देहलीज़ बुलाती है मुझे लौट आओ|
यही खुशबू मुझे वापस नहीं आने देती |
रंज और दर्द में डूबी यह बहार उतरी है|
कोई खुशबू मेरी देहलीज़ के पार उतरी है ||
कोई खुशबू मेरी देहलीज़ के पार उतरी है||
इस में कुछ रंग भी है , ख्वाब भी, खुशबुएँ भी|
ज़िलमिलाती हुई ख्वाहिशे भी , आरजू भी |
इसी खुशबू में कई दर्द भी, अफसाने भी |
इसी खुशबू ने बनाये कई देवाने भी |
मेरे आँचल पे उम्मीदों की कतार उतरी है|
कोई खुशबू मेरी देहलीज़ के पार उतरी है||
इसी खुशबू से कई यादो के दर खुलते है|
मेरे पैरो से जो लिपटे तो सफ़र खिलते है|
यही खुशबू जो मेरे घर से उठा लाई थी |
अब किसी तौर पलट कर नहीं जाने देती |
मेरी देहलीज़ बुलाती है मुझे लौट आओ|
यही खुशबू मुझे वापस नहीं आने देती |
रंज और दर्द में डूबी यह बहार उतरी है|
कोई खुशबू मेरी देहलीज़ के पार उतरी है ||
Wednesday, March 16, 2011
मेरे कातिल
वो जो वादा करते थे
क़यामत तक साथ निभाने का
अपने वादों के साथ वो भी
कब के माज़ी हो गये |
इस अदा से उसने माँगा, हक-ए-मोह्हब्बत
अपने कतल के फरमान पर
हम भी राज़ी हो गये |
इसे फैसला तक़दीर का माने
या हालात का कहर
कतल किया उसने मेरा
जो अब क़ाज़ी हो गये |
सज़ा दे तो दे किसको ए खुदा
सुना है मेरे कातिल अब हाजी हो गये |
- Babli
क़यामत तक साथ निभाने का
अपने वादों के साथ वो भी
कब के माज़ी हो गये |
इस अदा से उसने माँगा, हक-ए-मोह्हब्बत
अपने कतल के फरमान पर
हम भी राज़ी हो गये |
इसे फैसला तक़दीर का माने
या हालात का कहर
कतल किया उसने मेरा
जो अब क़ाज़ी हो गये |
सज़ा दे तो दे किसको ए खुदा
सुना है मेरे कातिल अब हाजी हो गये |
- Babli
Friday, March 11, 2011
Destination
Wednesday, March 9, 2011
Sunday, March 6, 2011
Remebering LOVE
"Oh! Its a treat
Its ur company
with love in the air & spirits high
Utter silence, Solitude & heavy breaths
Eyes heavy , half closed & shy
Divine joy, thronging heart-beats
Hand-in-hand, a kiss strengthen our tie
Love confined to limit
Years compressed to minutes
When passionate moments fly
Time to depart.....
Flowery togetherness pricked
With sharp thorn of "GOOD BYE"
And Then----
Missing You is Unavoidable as breathing
In that case
I would prefer to die.."
Its ur company
with love in the air & spirits high
Utter silence, Solitude & heavy breaths
Eyes heavy , half closed & shy
Divine joy, thronging heart-beats
Hand-in-hand, a kiss strengthen our tie
Love confined to limit
Years compressed to minutes
When passionate moments fly
Time to depart.....
Flowery togetherness pricked
With sharp thorn of "GOOD BYE"
And Then----
Missing You is Unavoidable as breathing
In that case
I would prefer to die.."
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